छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में समाज सेवा और परोपकार की एक नई मिसाल कायम की है। ग्राम सकरी के 81 वर्षीय भगत दशरथ वर्मा ने निधन के उपरांत अपनी देह का दान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मानवता के हित में लिया गया यह निर्णय वास्तव में अमूल्य प्रेरणा का स्रोत है। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (CIMS) में भगत दशरथ वर्मा की देहदान की प्रक्रिया पूरी की गई। 81 वर्ष की आयु में, उन्होंने यह महान निर्णय लेकर समाज को संदेश दिया कि सच्ची सेवा मृत्यु के बाद भी जारी रह सकती है।

भगत दशरथ वर्मा का संक्षिप्त परिचय:
नाम: भगत दशरथ वर्मा
उम्र: 81 वर्ष
निवास: ग्राम सकरी (प), ब्लॉक पलारी, जिला बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
परिवारजनों के अनुसार, वे सरल जीवन, दयालु स्वभाव और सेवा-भाव के व्यक्ति थे। उनके जीवन में यह आध्यात्मिक परिवर्तन संत रामपाल जी महाराज के सत्संग से प्रभावित होकर आया, जिसने उन्हें अपने शरीर को मानव-सेवा के लिए समर्पित करने की प्रेरणा दी।

परिवार का सहयोग:
दिवंगत आत्मा की इस पवित्र इच्छा का परिवार ने भी पूरा सम्मान किया। उनकी पत्नी भक्तमति पांचोबाई वर्मा और पुत्रों – भगत डोमारसिंह वर्मा, टेकराम वर्मा, और भगत हरिराम वर्मा ने देहदान की प्रक्रिया को पूर्ण सहयोग दिया। यह निर्णय परिवार की महान सोच और समाज-सेवा की भावना को दर्शाता है।
देहदान का महत्व:
यह कार्य चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भविष्य के डॉक्टरों को मानव शरीर रचना का सही ज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है। भगत दशरथ वर्मा का यह कदम न केवल उनके परिवार, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए एक प्रेरणा-स्रोत है।

संत रामपाल जी महाराज जी अपने सत्संग में बताते हैं कि “सच्ची भक्ति मनुष्य को दया, करुणा और परोपकार के कार्यों की ओर प्रेरित करती है।” इसी दिव्य ज्ञान से प्रभावित होकर भगत दशरथ वर्मा जी ने जीवन की अंतिम बेला तक समाज-हित को सर्वोपरि रखा।
समाज के लिए प्रेरणादायक कदम
भगत दशरथ वर्मा का यह निर्णय न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि
ग्राम, ब्लॉक, जिला और सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरणा-स्रोत है।
उनकी यह अमूल्य सेवा आने वाली पीढ़ियों को भी मानवता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।
उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह सिद्ध किया कि
“सच्ची सेवा मृत्यु के बाद भी जारी रहती है।”
इस महान कार्य ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची भक्ति मनुष्य को दया, करुणा और परोपकार के कार्यों की ओर प्रेरित करती है। भगत दशरथ वर्मा का यह अमूल्य योगदान आने वाली पीढ़ियों को मानवता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

