जिम्मेदार अधिकारी की कार से हादसे का आरोप, घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया; हादसे के बाद राजनीतिक रसूख का हवाला देकर दबाव बनाने की कोशिश का भी आरोप
सारंगढ़ :- राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव में एक ओर जश्न और उत्साह का माहौल था, तो दूसरी ओर जिम्मेदारों की लापरवाही ने दो महिलाओं को अस्पताल पहुंचा दिया। कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं बिहान योजना की महिलाओं के लिए राज्योत्सव का दिन उस वक्त हादसे में बदल गया, जब एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
मिली जानकारी के अनुसार, राज्योत्सव कार्यक्रम में देरी होने के कारण बिहान योजना से जुड़ी महिलाएं बाहर एक होटल के पास नाश्ता करने के बाद जमीन पर बैठकर आराम कर रही थीं। इसी दौरान अचानक तेज रफ्तार से पहुंची एक कार ने वहां बैठी महिलाओं को कुचलते हुए आगे निकल गई। हादसे में पीआरपी शीतल बर्मन और पीआरपी सत्यवती कुर्रे को मामूली चोटें आईं, जबकि कैडर जगमती बरिहा और गौरी बरिहा भी घायल हो गईं। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका एक्स-रे सहित चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। फिलहाल सभी की स्थिति ठीक बताई जा रही है।
हादसे के बाद रसूख दिखाने का आरोप!
इस मामले में जिस कार से हादसा होने की बात सामने आई है, वह बिहान शाखा बिलाईगढ़ में बीपीएम एडीओ पद पर कार्यरत कमलेश नवरंगे की बताई जा रही है। जब कमलेश नवरंगे से मामले को लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने अस्पताल में इलाज कराने की बात कही। वहीं, आरोप है कि इसके बाद उन्होंने राजनीतिक पहुंच का हवाला देते हुए राजनीति से जुड़े कुछ लोगों को फोन कराकर मामले में दबाव बनाने का प्रयास किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।
आखिर राज्योत्सव में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी
यह घटना आयोजन की व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिले के बड़े सरकारी आयोजन में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी के बावजूद महिलाओं के बैठने और आवागमन वाले स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी? क्या वहां वाहनों के प्रवेश और आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे? आखिर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?
राज्योत्सव जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में यदि महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो व्यवस्थाओं की सफलता पर सवाल उठना लाजिमी है। गनीमत रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन चार महिलाओं का घायल होना कोई मामूली घटना नहीं है। अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, वाहन चालक की जिम्मेदारी तय की जाए और आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
