सारंगढ़ / साल्हे :- ग्राम पंचायत साल्हे में विकास कार्यों के नाम पर धांधली का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जनपद पंचायत सारंगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत साल्हे में वर्तमान सरपंच मोहरसाय साहू पर पूर्व सरपंच के कार्यकाल में हुए कार्यों को अपना बताकर सरकारी खजाने में सेंध लगाने का संगीन आरोप लगा है। पुराना काम, नया बिल: खेल ऐसा कि आंखें फटी रह जाएं सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पूर्व सरपंच के कार्यकाल के दौरान 15वें वित्त आयोग या अन्य मदों से जो बोर खनन कार्य हुए थे, वर्तमान सरपंच मोहरसाय साहू ने उन्हीं पुराने कार्यों पर केवल 5,000 से 10,000 रुपये का लीपापोती वाला काम कराया। इसके बाद इसे नया काम दर्शाते हुए कागजों में हेरफेर कर लाखों रुपये के फर्जी बिल पास करा लिए गए। सीधे शब्दों में कहें तो काम किसी और का, और मलाई खुद डकारने की यह साजिश खुलेआम रची गई।

जनता के पैसों पर खुला डाका
गांव के विकास और पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए आई सरकारी राशि को कागजी बाजीगरी के जरिए ठिकाने लगा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जो बोर पहले से मौजूद थे, उन्हें ही अपना बताकर राशि आहरण करना सीधे तौर पर गबन और जनता के साथ खुली धोखाधड़ी है। क्या सो रहा है पंचायत विभाग और प्रशासन?
अब सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत सारंगढ़, पंचायत विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। बिना मौके का भौतिक सत्यापन किए लाखों के बिल कैसे पास हो गए? क्या इस फर्जीवाड़े में तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदारों की भी मौन सहमति थी? क्या जिला प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरपंच पर एफआईआर दर्ज करेगा या फिर जांच के नाम पर लीपापोती होगी? ग्राम पंचायत साल्हे में हुए इस फर्जीवाड़े के हर एक बिल-वाउचर और जिम्मेदारों के चेहरे जल्द बेनकाब होंगे।
अगले अंक में पढ़िए: घोटाले की इनसाइड स्टोरी: कैसे गढ़ी गई फर्जी फाइलों की पटकथा? कागजी बाजीगरी: पुराने बोर पर चंद हजार रुपये पोतकर लाखों का एमबी (Measurement Book) रिकॉर्ड कैसे तैयार हुआ?
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