बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसकी बानगी ग्राम पंचायत साल्हे (LGD Code: 128499) में साफ देखने को मिल रही है। ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल से सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-2026 में पंचायत के विकास फंड और सरकारी पैसों को एक सोची-समझी रणनीति के तहत एक ही व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए झोंक दिया गया है। कागजों में नाला सफाई, धुलाई और निर्माण सामग्री के नाम पर सरकारी खजाने से खुलेआम मनमानी रकम निकाली जा रही है, और इन भुगतानों के केंद्रबिंदु में सिर्फ एक ही नाम है—अशोक कुमार (बैंक खाता संख्या ***8841)।
जुलाई 2025 में भुगतानों की बाढ़
दस्तावेजों के अनुसार, जुलाई 2025 के आखिरी सप्ताह (विशेषकर 21 जुलाई 2025 और 30 जुलाई 2025) में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की झड़ी सी लग गई। एक ही व्यक्ति के खाते में चंद दिनों के भीतर दर्जनों बार अलग-अलग वाउचर के जरिए राशि ट्रांसफर की गई, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनुशासनहीनता और बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है।
अशोक कुमार के खाते में गए प्रमुख भुगतानों का विवरण:
ईंट धुलाई और सामग्री भुगतान: 21 जुलाई 2025 को वाउचर क्रमांक XVFC/2025-26/P/1 के तहत ‘ईंट धुलाई सहित भुगतान’ के नाम पर 11,732 रुपये का भुगतान अशोक कुमार को किया गया।
नाला सफाई और धुलाई के नाम पर बंदरबांट: 21 जुलाई 2025 को ही ‘नाला सफाई’ के लिए वाउचर P/2 के तहत 7,000 रुपये तथा वाउचर P/3 व P/4 के तहत ‘नाला गाज सफाई’ के नाम पर क्रमशः 7,000 रुपये और 6,000 रुपये ट्रांसफर किए गए।
लगातार और विभाजित भुगतान: इसी तरह 21 जुलाई को ही वाउचर P/7, P/8, P/9, और P/10 के तहत ‘नाला गाद धुलाई/सफाई’ के नाम पर अलग-अलग मदों में 8,000 रुपये, 8,000 रुपये, 8,000 रुपये और 6,000 रुपये की राशि धड़ाधड़ अशोक कुमार के खाते में डाली गई।
देवघाट नाला सफाई के नाम पर खेल: 30 जुलाई 2025 को वाउचर क्रमांक XVFC/2025-26/P/13, P/14 और P/15 के तहत ‘देवघाट नाला सफाई’ के नाम पर फिर से 8,000 रुपये, 8,000 रुपये और 6,000 रुपये के भुगतान किए गए।
सरपंच के डिजिटल हस्ताक्षर से हुई पुष्टि
इन तमाम संदेहास्पद और फौरी भुगतानों की फाइलों पर ग्राम पंचायत साल्हे के सरपंच मोहरसाय साहू (Moharsay Sahu) के डिजिटल सिग्नेचर (DSC) मौजूद हैं। पंचायत के शीर्ष जिम्मेदार द्वारा PFMS प्रक्रिया के जरिए इन भुगतानों को तुरंत प्रस्ताव देकर स्वीकृत किया गया और बैंक के माध्यम से चंद घंटों में राशि का भुगतान भी सुनिश्चित कर दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या पंचायत में केवल एक ही मजदूर या ठेकेदार (अशोक कुमार) बचा है, जिसे नाला सफाई से लेकर ईंट धुलाई तक के सारे सरकारी ठेके दे दिए गए? क्या धरातल पर वाकई इतनी बड़ी मात्रा में नाला सफाई का काम हुआ या फिर यह सिर्फ कागजों पर फर्जी वाउचर तैयार कर सरकारी धन को ठिकाने लगाने का खेल है?
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। यदि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के अधिकारी निष्पक्ष जांच करें, तो इन दस्तावेजों के पीछे छिपे बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होना तय है।
ग्राम पंचायत साल्हे में सरकारी खजाने की खुली लूट: एक ही व्यक्ति ‘अशोक कुमार’ के खाते में धड़ाधड़ ट्रांसफर हुए हजारों रुपये, सरपंच की भूमिका संदिग्ध
