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जनता की हिफाजत करने वाले पुलिस परिवारों का आशियाना बदहाल!

BySamip Anant

Sep 23, 2026
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कहीं जर्जर दीवारें तो कहीं पन्नी के सहारे छत… सारंगढ़ में पुलिस आवासों की हालत पर उठे गंभीर सवाल

सारंगढ़ बिलाईगढ़ :- छत्तीसगढ़ की पुलिस दिन-रात आमजन की सुरक्षा में मुस्तैद रहती है। कानून-व्यवस्था से लेकर अपराध नियंत्रण तक, पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। रक्षाबंधन हो, दीपावली हो या होली—कई पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहकर ड्यूटी निभाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जो परिवार प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले जवानों का इंतजार करते हैं, उनके अपने आशियाने कितने सुरक्षित हैं? सारंगढ़ जिला मुख्यालय में पुलिसकर्मियों के लिए बने कुछ आवासों की स्थिति सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जर्जर दीवारें, खराब भवन और पन्नी के सहारे ढकी छतें पुलिस परिवारों की मुश्किलों की तस्वीर बयां कर रही हैं।

बारिश, तेज गर्मी और मौसम की मार के बीच इन आवासों में रह रहे परिवारों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। एक तरफ आलीशान आवासों की चर्चा, दूसरी तरफ पुलिस परिवारों की बदहाली राजधानी रायपुर से लगे नकटी गांव में सरकारी जमीन और प्रस्तावित आवासीय परियोजना को लेकर सामने आया विवाद भी हाल के दिनों में चर्चा में रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में वहां मकानों को हटाने की कार्रवाई और प्रस्तावित विधायक आवास से जुड़े अलग-अलग दावे सामने आए हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से विधायक कॉलोनी के प्रस्ताव को लेकर अलग स्थिति बताई गई है।

ऐसे में सवाल यह है कि सरकारी आवासीय योजनाओं और भवन निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च करने की चर्चा के बीच पुलिसकर्मियों के पुराने और जर्जर आवासों की सुध कब ली जाएगी? पुलिसकर्मियों के परिवार पूछ रहे हैं सवाल जो जवान दिन-रात जनता की सुरक्षा के लिए सड़कों पर तैनात रहते हैं, उनके परिवारों को क्या सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी नहीं है? यदि पुराने पुलिस आवासों की मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध है तो सारंगढ़ के इन भवनों की स्थिति अब तक क्यों नहीं सुधरी? क्या इन भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराया गया है? क्या जर्जर भवनों की सूची तैयार की गई है?
क्या नए आवास निर्माण की कोई योजना प्रस्तावित है?
और सबसे बड़ा सवाल—पुलिसकर्मियों के परिवारों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए जिम्मेदार विभाग कब जागेगा? त्योहारों में भी घर से दूर रहते हैं जवान
पुलिस की नौकरी सामान्य नौकरी नहीं है। ड्यूटी की मांग के कारण पुलिसकर्मी अक्सर अपने परिवार और बच्चों से दूर रहते हैं। जब आम लोग त्योहारों में अपने घरों में खुशियां मनाते हैं, तब कई पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सड़कों पर तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके परिवारों को कम से कम सुरक्षित और रहने योग्य सरकारी आवास मिलना उनकी बुनियादी जरूरत है।

बड़ा सवाल : सुरक्षा देने वालों की सुरक्षा कब?
सारंगढ़ के पुलिस आवासों की स्थिति यदि वास्तव में इतनी जर्जर है, तो संबंधित विभाग को इसका तत्काल संज्ञान लेकर भवनों का तकनीकी निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत और जरूरत पड़ने पर नए आवासों की व्यवस्था करनी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ दीवार और छत का नहीं है—सवाल उन परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और भरोसे का है, जिनके सदस्य हर वक्त प्रदेश की जनता की हिफाजत में खड़े रहते हैं। जो पुलिसकर्मी 24 घंटे जनता की हिफाजत में खड़े हैं, उनके परिवारों के सुरक्षित आशियाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी?”

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