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सेवा परमो धर्म: को चरितार्थ करने वाला ही महामानव- सेवा भारती सारंगढ़

BySamip Anant

Mar 22, 2026
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सारंगढ़ बिलाईगढ़ :- युग-युगांतर से प्रचलित वाणी सेवा परमो धर्म: को आत्मसात कर चरितार्थ करने वालों को ही भविष्य में महामानव की उपाधि मिलती है। राष्ट्र सेवा या माता-पिता संग मानव जाति या जीव-जंतुओं की सेवा हो सभी में धर्म की प्राप्ति के साथ-साथ लोगों को आत्म संतुष्टि के बीच जीवन भी सफल होता है। उक्त बातें यादव समाज के अध्यक्ष जगजीत यादव ने कही। देश की सेवा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही देश सेवा के लिए संकल्पित नहीं है, बल्कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है किसी न किसी रूप में अपनी मातृभूमि, जन्मभूमि एवं कर्मभूमि की सेवा करना।

बाल्य काल से ही बच्चों के अंदर सेवा की भावना पैदा करना चाहिए। यह माता-पिता एवं शिक्षकों का दायित्व है। वहीं माता-पिता की सेवा परम सेवा है। जन्म देकर बच्चों के भविष्य के लिए कई प्रकार के कंटकाकीर्ण रास्तों से गुजरने वाले माता-पिता का सेवा नि:स्वार्थ भाव से होना चाहिए। जो भी व्यक्ति अपने इस क‌र्त्तव्य के प्रति उदासीन होकर उनका दुराभाव करता है, वह मानव कहलाने के लायक नहीं। किसी कड़ी में सेवा भारती द्वारा आज ऐसे वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य शिक्षा भोजन उपलब्ध कराई जा रही है जो कि स्वयं के निजी खर्चे से वहां किया जाता है समाज से किसी प्रकार का सहयोग नहीं लेता.

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