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डार्क कपड़ों पर ज्यादा बैठते हैं मच्छर, फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में एक बार दवा जरूरी: डॉ. एफ.आर. निराला

BySamip Anant

Feb 7, 2026
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फाइलेरिया से बचाव का मंत्र – मच्छरों से दूरी और साल में एक बार दवा जरूरी

सारंगढ़ बिलाईगढ़ :- फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर शनिवार को जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित प्रेस वार्ता में जिला कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एफ.आर. निराला ने लोगों से सामूहिक दवा सेवन अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया, जिसे आम बोलचाल में हाथीपांव कहा जाता है, मच्छरों के काटने से फैलने वाली गंभीर संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर दवा लेने और बचाव के उपाय अपनाने से इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।

कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौज ने की अपील
जिला कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौज ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का अभियान है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें, दवा का अनिवार्य रूप से सेवन करें और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें, ताकि जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सके।

डॉ. निराला ने बताया कि मच्छर गहरे (डार्क) रंगों पर अधिक बैठते हैं, इसलिए खासकर शाम और रात के समय हल्के रंग के कपड़े पहनना चाहिए। साथ ही मच्छरदानी का उपयोग और आसपास साफ-सफाई रखना फाइलेरिया रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है।

उन्होंने जानकारी दी कि जिले में 10, 11 और 12 तारीख को सामूहिक दवा वितरण अभियान (एमडीए) चलाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी स्वस्थ लोगों को DEC और Albendazole (कुछ स्थानों पर Ivermectin सहित) की दवा खिलाएगी। दवा हमेशा भोजन के बाद और स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने ही लेनी चाहिए।

CMHO ने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है, हालांकि जिन लोगों के शरीर में पहले से माइक्रोफाइलेरिया होते हैं, उन्हें हल्का बुखार, चक्कर या सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, जो दवा के असर का संकेत हैं। अधिक परेशानी होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

क्या है फाइलेरिया?
यह बीमारी स्यूलेक्स प्रजाति के संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। इसके कीटाणु कई वर्षों तक शरीर में बिना लक्षण के रह सकते हैं और बाद में हाथ, पैर या अंडकोष में असामान्य सूजन का कारण बनते हैं। यह न तो आनुवंशिक है और न ही छूने या साथ खाने से फैलती है।

समुदाय की भागीदारी जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब तक 80 प्रतिशत से अधिक आबादी दवा का सेवन नहीं करती, संक्रमण की श्रृंखला नहीं टूटेगी। भारत सरकार ने फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए जनसहयोग बेहद जरूरी है। जिले में जागरूकता बढ़ाने के लिए दीवार लेखन, पोस्टर, बैनर और पत्राचार के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

डॉ. निराला ने आम जनता से अपील की कि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जा रही फाइलेरिया रोधी गोली अवश्य लें और इस जनहितकारी अभियान को सफल बनाएं। प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे

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