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कोरबा खनिज और पर्यावरण विभाग की शह पर हो रहा राखड़ और उत्खनन से निकले ओबी मिट्टी और गिट्टी चोरी का खेल?

BySamip Anant

Jul 2, 2025
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माइनिंग प्लान में स्वीकृत जल भंडारण टैंक में राखड़ डंप किया जा रहा, कोरबा खनिज और पर्यावरण ने दी हुई है मंजूरी.

तान नदी से मात्र चंद मीटर की दुरी पर बने साफ पानी के जल भंडारण टैंक में राखड़ डंप किया जा रहा।


बांगो थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कोनकोना ग्राम घोघरापारा के साफ पानी के जल भंडारण टैंक को राखड़ से पाटने की सहमति कानकोना ग्राम के सरपंच ने आखिर क्यू दी जबकि कुछ दुरी पर तान नदी भी बह रही है ?

(वरिष्ठ पत्रकार गोविन्द शर्मा/राकेश परिहार की ग्राउंड रिपोर्ट )

कोरबा :- एक तरफ पूरा विश्व पानी के सोर्स बचाने में लगा है लोग कहते है अगला युद्ध यदि होगा तो पानी के लिये ही होगा लेकिन सवाल यह है कि कलेक्टर कार्यालय के छत नीचे माइनिंग प्लान में स्वीकृत प्लान को धता बता एन वो सी जारी कर दी ।

सवाल यह भी है कि क्या पानी के किसी भी तरह के स्रोत को राखड़ से पाटा जासकता है ?



जी हाँ हम बात कर रहें है कोरबा खनिज एवं पर्यवारण विभाग ने साफ पानी से भरे जल भंडारण टैंक में राखड़ (ऐश) को डाल कर उसे बंद करने का काम कर रही है।
कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड व तहसील के ग्राम पंचायत  कोनकोना में घोघरापारा में पूर्व के वर्षो में सड़क बनाने के लिये दिलीप बिल्डकान नामक कम्पनी को रोड निर्माण हेतु
खनिज एवं पर्यावरण विभाग के द्वारा आस्थाई तौर पर  पत्थर उत्खनन की अनुमति दी। उत्खनन के उपरांत उस रिक्त स्थान का उपयोग भविष्य में निम्नानुसार किया जाने का शासन – प्रशासन द्वारा माइनिंग प्लान स्वीकृत किया गया।
जिसमे कहा गया कि
खनन से निकाली गई भूमि –


खनन कार्य के परिणामस्वरूप, मूल भूमि प्रोफ़ाइल में परिवर्तन होगा। खनन कार्य पूरा होने के बाद कुल 0.714 हेक्टेयर क्षेत्र परिवर्तित भूमि प्रोफ़ाइल के साथ खुल जाएगा।

ii) ऊपरी मृदा का भंडारण एवं रोकथाम –

– भूमि उपयोग और वृक्षारोपण के लिए खदान सीमा पर ऊपरी मिट्टी को संरक्षित किया जाएगा।

– अन्यत्र जमा अतिरिक्त ओबी को खदान सुधार के लिए प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जाएगा।

iii) अस्थायी परमिट प्राप्त क्षेत्र के दौरान और उसके अंत में उत्खनन गतिविधियों से प्रभावित भूमि के पुनर्ग्रहण का प्रस्ताव –

खनन क्षेत्र का पुनः प्राप्ति सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि है। खनन कार्य के परिणामस्वरूप भूमि की मूल रूपरेखा बदल जाएगी। पुनः प्राप्ति की गतिविधियाँ तभी शुरू की जाएँगी जब खनन की इष्टतम मोटाई प्राप्त हो जाए जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो।

पुनर्ग्रहण के लिए पर्याप्त मात्रा में सामग्री उपलब्ध न होने के कारण पूर्ण पुनर्ग्रहण कार्य संभव नहीं होगा। भूमि से खनिज की पूरी निकासी के बाद खदान की ढलान को सुरक्षित कोण पर बनाए रखने के लिए स्टैक्ड ओबी का
उपयोग किया जाएगा और शेष अप्राप्य गड्ढे को जल भंडारण टैंक के रूप में विकसित किया जाएगा।


लेकिन कोरबा खनिज एवं कोरबा पर्यावरण विभाग के द्वारा अपने ही स्वीकृत माइनिंग प्लान को धता बता पानी के रिसोर्स को बचाये जाने की जगह जल भंडारण टैंक को पाटने का आदेश दें दिया है ।
इतना ही नहीं जिन कंपनियों को राखड़ डंप करने एन ओ सी प्रदान की गई उन कंपनियों के द्वारा मिट्टी की चोरीकर शासन प्रशासन को राजस्व को चुना भी लगा रहे है ।
खनिज विभाग का मौन रहना दल में कुछ तो काला है कि ओर इशारा कर रहा है ।
पर्यावरण विभाग यह जानते हुए कि चंद मीटर की दूरी पर तान नदी बहती है और उसी नदी के स्रोत की वजह से गिट्टी उत्खनन के बाद हुए रिक्त स्थान पर जल का भराव हुआ है को जानते हुए विभाग के द्वारा आंखे बंद कर राखड डंपिंग के लिए संबंधित कंपनियों को एन ओ सी प्रदान करना बदनीयतीं की ओर इशारा कर रह है ।
सबसे बड़ा सवाल यह की यह पूरा मामला कलेक्टर के संज्ञान में है कि नहीं ।

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