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राजस्व अभिलेखों में अवैधानिक रूप से फेरबदल कर न्यायालय को गुमराह करने की नियत से शासकीय भूमि हड़पने का मामला

Samip Anant

BySamip Anant

Jul 24, 2025
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दलित परिवार ने दबंगों के खिलाफ जिला कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

🔴 दलित परिवार को उजाड़ने की कोशिश — कब्ज़ा वारंट लेकर मकान तोड़ने पहुंचे पुलिस और जेसीबी, 
आर. आई.- पटवारी द्वारा  भूमि चिन्हांकन में खुली पोल

घरघोड़ा (रायगढ़):- वार्ड क्रमांक 07 निवासी एक दलित परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके पड़ोसी जगन्नाथ ठाकुर और उसके परिवार द्वारा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उन्हें उनके मकान से जबरन बेदखल करने की साजिश बार बार रची जा रही है।

शिकायतकर्ताओं  भरत खंडेल एवं गोवर्धन खंडेल ने बताया कि दिनांक 07 जुलाई 2025 को मालगुजारी व्यवहार न्यायालय घरघोड़ा से झूठे तथ्यों के आधार पर कब्ज़ा वारंट जारी करवा लिया गया, जिसके बाद 14 जुलाई 2025 को पुलिस बल, आर. आई.- पटवारी और जेसीबी मशीन लेकर उनके घर को कब्ज़ा दिलाकर मकान तोड़ने की कोशिश की गई।

हालांकि, मौके पर आर. आई.- पटवारी द्वारा की गई भूमि जांच सीमांकन चिन्हांकन में यह स्पष्ट पाया गया कि जिस भूमि (खसरा नंबर 455/6) को लेकर कार्यवाही की जा रही थी, वह पहले से ही जगन्नाथ ठाकुर के  परिवार के कब्जे पाया गया और शिकायतकर्ता परिवार की कोई गलती नहीं है।

आर.आई.-पटवारी जांच रिपोर्ट के बाद मामले में न्यायालयीन कार्यवाही भी स्थगित हो गई, लेकिन इसके बावजूद पीड़ित परिवार का आरोप है कि जगन्नाथ ठाकुर और उनके परिजन लगातार उन्हें मानसिक, सामाजिक और कानूनी रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

दलित परिवार के उजड़ने की आशंका, प्रशासन से लगाई गुहार

पीड़ित परिवार का कहना है कि दुकान- मकान पूरे आशियाना को उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनका पूरा परिवार घर से बेघर हो सकता है। इससे उन्हें मानसिक, शारीरिक और सामाजिक तनाव झेलना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि पूर्व कर्मचारियों द्वारा किए  गए दस्तावेज़ कूटरचना की बार-बार शिकायत देने के बावजूद अभी तक जगन्नाथ ठाकुर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, बल्कि झूठे प्रकरणों में उन्हें ही फंसाया जा रहा है।

प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की मांग

दलित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ उचित ऐक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें उनके न्यायोचित अधिकारों से वंचित न किया जाए और उनका परिवार सुरक्षित रूप से रह सके।