सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- जिले के गुडेली और टीमरलगा क्षेत्र में संचालित क्रेशरों में पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चंद्रहासिनी क्रेशर से जुड़े मधु मालाकार का कहना है कि क्षेत्र में संचालित क्रेशरों में बाउंड्री वॉल और धूल नियंत्रण के लिए पानी के छिड़काव जैसी व्यवस्थाओं की स्थिति की जांच होनी चाहिए। मधु मालाकार ने आरोप लगाया है कि गुडेली और टीमरलगा में संचालित क्रेशरों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है तथा कई क्रेशर कथित तौर पर फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं।

अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग इन आरोपों की जांच कब करेगा? क्या सभी क्रेशरों के दस्तावेज, पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जा रहा है? यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार संचालकों पर क्या कार्रवाई होगी?

प्रशासन से मांग: संबंधित विभाग गुडेली और टीमरलगा क्षेत्र के क्रेशरों का निष्पक्ष निरीक्षण कर पर्यावरणीय नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट करे, ताकि धूल प्रदूषण पर नियंत्रण और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
नोट: क्रेशरों के फर्जी संचालन और नियमों के उल्लंघन संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित विभाग और क्रेशर संचालकों का पक्ष मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।
