समर्थकों ने कहा- नेता के समर्थन में राय रखना अनुशासनहीनता नहीं, लोकतांत्रिक अधिकार है
सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण मलाकार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। नोटिस के बाद जिले सहित प्रदेश के कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उमेश नंदकुमार पटेल के समर्थकों में नाराज़गी देखी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि किसी नेता के पक्ष में अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, इसे अनुशासनहीनता नहीं माना जाना चाहिए। जानकारी के अनुसार, अरुण मलाकार ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “हम भी चाहते हैं कि हमारे जननेता उमेश नंदकुमार पटेल जी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनें और भविष्य में प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बनें” अभियान के तहत एक पोस्ट साझा किया था।

पोस्ट में उमेश पटेल को जमीनी, युवा और संगठन को मजबूत करने वाला नेतृत्व बताते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की अपील की गई थी। इसी पोस्ट को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अरुण मलाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट से संगठन की छवि प्रभावित हुई है तथा यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

कार्यकर्ताओं ने जताई नाराज़गी
नोटिस जारी होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि कांग्रेस हमेशा लोकतांत्रिक विचारधारा की बात करती रही है, ऐसे में यदि कोई कार्यकर्ता संगठन के भीतर रहकर किसी नेता के पक्ष में अपनी राय रखता है तो उसे अनुशासनहीनता मानना उचित नहीं है।
समर्थकों का कहना है कि अरुण मलाकार वर्षों से कांग्रेस संगठन के सक्रिय और जमीनी नेता रहे हैं। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे नेता को केवल अपनी राजनीतिक पसंद व्यक्त करने पर नोटिस जारी किया जाना कार्यकर्ताओं को निराश करने वाला कदम है।
उमेश पटेल के समर्थन में चल रहा था अभियान
कार्यकर्ताओं के अनुसार, सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं था, बल्कि उमेश नंदकुमार पटेल के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त करने का अभियान था। उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष का चयन पार्टी नेतृत्व का अधिकार है, लेकिन कार्यकर्ताओं को अपनी पसंद रखने का भी अधिकार होना चाहिए। समर्थकों का दावा है कि उमेश पटेल युवाओं, किसानों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय नेता हैं। ऐसे में उनके समर्थन में अभियान चलाना संगठन को मजबूत करने की भावना से प्रेरित था, न कि पार्टी विरोधी गतिविधि।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
नोटिस सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अरुण मलाकार के समर्थन में पोस्ट साझा कर रहे हैं और इसे कार्यकर्ताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, कुछ लोग संगठनात्मक अनुशासन का हवाला देते हुए पार्टी के निर्णय का समर्थन भी कर रहे हैं। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस की ओर से नोटिस जारी होने के बाद सभी की निगाहें अरुण मलाकार के लिखित स्पष्टीकरण और संगठन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
