रावण द्वारा सीता माता का एक ही बार किया गया था अपहरण।
परंतु प्रतिवर्ष किया जाता है रावण के मूर्ति का दहन ।
चाहे लाख बार कर लो रावण की मूर्ति का दहन।
दुष्कर्म करने वालों को कानून के हवाले करने में क्यों भैभीत हैं जीवन ।
इस कलयुग में लाख बेटियों की इज्जत को है कहर।
कैसी है यह समाज की गिरी नजर।
सराहा तो जाता नहीं है किसी से।
चाहे उनके जीवन पर कितना भी कष्ट बरसे।
कब तक बेटियां मुंह छूपाती जीवन जीएगी।
आत्म विश्वास तो कोई बढ़ाओ इनका।
बेटियां दुस्टो का सर्वनाश करेगी।
नारी रूप धरे जो माता का दुर्गा काली बन जाती है ।
दुस्टो का संघार कर धरती माता का बोझ घटती है।
अपनी इच्छा की संतुष्टि करें दुष्कर्म करके।
इस पाप का प्रायश्चित ना कर पाए वो मरके।
अपने गुनाहों को वह कभी ना करेंगे कबूल ।
उनके घर में भी माता, बहन, बेटी वो ये बात गए हैं भूल।
अपने घर में इज्जत जो लूटी उन्हें क्यों नहीं है ये मलाल।
उन्होंने भी तो किसी बेटी की इज्जत है लूटी क्यों आता नहीं उनको ये ख्याल।
पत्नी की लाज बचाने के लिए राम ने किया रावण का खत्म नामो निशान।
लोगों का क्या कहना यहा तो सीता माता का भी हुआ है अपमान।
मैं पूछती हूं असली रावण है कौन ?
सीता माता का अपहरण करने वाला या बेटियों की लाज लूटने वाला?
नारियों को प्रोत्साहित करो कोई। धर्म की रक्षा नारी ही कर पाई।
इस कलयुग में लाख बेटियों की इज्जत का है कहर।
कैसी है ये समाज की गिरी नजर
कवित्री लक्ष्मी सतनामी कक्षा बारहवीं शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कोतलिया
